Monday, April 16, 2012

आखिर आ ही गयी तू मेरी गली


आखिर आ ही गयी तू मेरी गली,
जैसे बहती हो कोई पगली नदी.

तेरा आना बताए तेरे प्यार का रंग,
जैसे बिखरे है थाली मैं से कुम कुम के रंग,
मेरा दिल खीचा चल आए जैसे तेरी आँचल की डोर,
जैसे ही मुड जाये तू मेरी गली ओर.
तेरी पायल है खनके जैसे सावन बिजली लड़ी,
लटे लिपट जायें माथे पे जैसे आंधी - पत्ते कालि,
मोहे चिढ़ा सी जाए तेरी सुनहरी महक,
जैसे गर्मी मैं भीगी हो किसी गली की सड़क...

देख, आखिर आ ही गयी तू मोहि गली,
जैसे बहती हो कोई पगली नदी.



Thoughts of a young man who describes the entry of a young woman (he is in love with) in his lane as he waits for her every day, always.



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